राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद महागठबंधन में बढ़ी तकरार, सहयोगी दलों पर लगे क्रॉस वोटिंग के आरोप
Tensions escalate within the Grand Alliance following
रांची। Tensions escalate within the Grand Alliance following, सत्तारूढ़ गठबंधन समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद महागठबंधन में घमासान छिड़ गया है। सभी कांग्रेसी एकजुट होकर जहां अपने विधायकों के प्रति विश्वास जता रहे हैं, वहीं क्रास वोटिंग का पूरा ठाकरा राजद और भाकपा माले पर फोड़ रहे हैं।
पार्टी क्रास वोटिंग के लिए न तो अपने और न ही झामुमो विधायकों पर कोई आरोप लगा रही है। राजद और भाकपा माले के विधायकों द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी के विरोध में क्रास वोटिंग करने का सबसे पहले आरोप स्वयं प्रदेश प्रभारी के. राजू ने लगाया। इसके बाद कांग्रेस कोटे के सभी मंत्री के. राजू के स्वर में स्वर मिलाने लगे।
कांग्रेस पर किया पलटवार
कांग्रेसियों के बयान वायरल होने के बाद राजद और भाकपा माले के नेता न केवल कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने की सफाई दी, बल्कि कांग्रेस पर पलटवार भी किया। यहां तक कह दिया कि कांग्रेस के विधायकों ने ही अपने प्रत्याशी के विरोध में क्रास वोटिंग की।
कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद महागठबंधन में छिड़ा यह घमासान इसकी सेहत पर भी असर डाल सकता है। विश्वासघात की जानकारी आलाकमान तक दी जाएगी। वहीं, कांग्रेस राजद को मंत्रिमंडल से बाहर करने का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दबाव भी डाल सकती है। हालांकि झामुमो इस मामले में अभी तक तटस्थ बना हुआ है।
2019 के बाद पहली बार किसी मोर्चे पर विफल रहे हेमंत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वर्ष 2019 के बाद पहली बार किसी मोर्चे पर विफल रहे हैं। शुरू में कांग्रेस द्वारा स्वयं प्रत्याशी घोषित किए जाने तथा उसके बाद मान-मनौव्वल के बाद वह सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों की जीत के प्रयास में लग गए थे। उन्होंने स्वयं नेतृत्व भी संभाल लिया था। सारी रणनीति मुख्यमंत्री आवास में उनके मार्गदर्शन में ही बन रहीं थीं।
इन सब के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद उन्हें समीक्षा करनी होगी कि चूक कहां रह गई। यदि राजद की ओर से सही में क्रास वोटिंग हुई है तो वह निश्चित रूप से गठबंधन में उसे बनाए रखने की समीक्षा करेंगे। चूंकि भाकपा माले सरकार को बाहर से समर्थन कर रहा है, इसलिए उसपर कोई असर नहीं पड़ेगा।